होरी ने दोनों बैलों को पानी पिला, नाँद में चारा डाल, पत्नी धनिया से बोला—गोबर को कहाँ भेजा है? मैं तो अब घर से नहीं जा सकता, नहलाना है। जरा उसे बुला ले, तो चला जाऊँ।
धनिया के हाथ इस समय गोबर से भरे थे। उपले पाथकर आ रही थी। बोली—अब आते ही होंगे। तुम जाकर नहा-धो लो। ऐसा कौन-सा राज-काज है जो अभी किए बिना काम नहीं चलेगा।