श्रीरामचरितमानस – बालकांड
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।
सब कर मत खगनायक एहा।
करिय राम पद पंकज नेहा।।
राम भगति चिंतामनि सुंदर।
बसइ गरुड़ जाके उर अंतर।।
[Excerpt from the opening of Tulsidas' Ramcharitmanas. Public domain.]
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।
सब कर मत खगनायक एहा।
करिय राम पद पंकज नेहा।।
राम भगति चिंतामनि सुंदर।
बसइ गरुड़ जाके उर अंतर।।
[Excerpt from the opening of Tulsidas' Ramcharitmanas. Public domain.]