सरोज-स्मृति
दुःख ही जीवन की कथा रही,
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!
हो इसी कर्म पर वज्रपात,
यदि धर्म, रहे नत मात्र माथ,
जिससे हारे सब जीव-जात,
वह मृत्यु, अरे तेरी हो हार!
[Elegy for Nirala's daughter Saroj — one of the most moving poems in Hindi. Public domain in India.]