The battle is not over — Dinkar's poem to the citizens of independent India.
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समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।
समर शेष है, यह प्रकाश केवल हिमगिरि पर होगा,
यह ज्वाला केवल पर्वत के अंगारों में सोगी।