कबीर के दोहे
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो मन खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।
पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात।
देखत ही छिप जाएगा, ज्यों तारा प्रभात।।
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोय।।
साईं इतना दीजिये, जामे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।।
[Selected timeless couplets from Sant Kabir. Public domain.]