मैं नीर भरी दुख की बदली
मैं नीर भरी दुख की बदली!
स्पन्दन में चिर निस्पन्द बसा,
क्रन्दन में आहत विश्व हँसा,
नयनों में दीपक से जलते,
पलकों में निर्झरिणी मचली!
मैं नीर भरी दुख की बदली!
[Iconic poem by Mahadevi Verma. Public domain in India.]
मैं नीर भरी दुख की बदली!
स्पन्दन में चिर निस्पन्द बसा,
क्रन्दन में आहत विश्व हँसा,
नयनों में दीपक से जलते,
पलकों में निर्झरिणी मचली!
मैं नीर भरी दुख की बदली!
[Iconic poem by Mahadevi Verma. Public domain in India.]