ghazal · 1310

Chhap Tilak

छाप तिलक

Amir Khusro· Sufi Era

The immortal qawwali of surrender to the beloved (Nizamuddin Auliya).

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छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके। प्रेम भटी का मदवा पिलाइके, मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके। गोरी गोरी बइयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ, बइयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके। बल बल जाऊँ मैं तोरे रंग रजवा, अपनी सी रंग दीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके। खुसरो निजाम के बल बल जाइए, मोहे सुहागन कीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके॥
#qawwali#sufi

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