वह आता— दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक, चल रहा लकुटिया टेक, मुट्ठी-भर दाने को — भूख मिटाने को मुँह फटी-पुरानी झोली को फैलाता॥