doha · 1600

Rahiman Dhaga Prem Ka

रहिमन धागा प्रेम का

Rahim· Bhakti-Sufi Era

The delicate thread of love should never be snapped.

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रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ि जाय॥ रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥ रहिमन विपदा हूँ भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय॥
#doha#niti

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