रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ि जाय॥
रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥
रहिमन विपदा हूँ भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय॥
The delicate thread of love should never be snapped.