poem · 1938

Vipada

विपदा

Mahadevi Verma· Chhayavaad
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कौन तुम मेरे हृदय में? कौन मेरी शून्यता के अंतरिक्ष में गूँज सा जो घुल गया है? कौन प्रति-पग-चिह्न सा मेरे लिए गंतव्य के मग पर बिछा है?
#chhayavaad

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