मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तुझको फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला॥
बने पुजारी प्रेमी साक़ी, गंगा जल पावन हाला,
रहे फेरता अविरत गति से मधु के प्यालों की माला,
और लिये जा, और पीये जा, इसी मंत्र का जाप करे—
'मैं शिव की, शिव मेरे हैं', यह अद्वैत है मधुशाला॥