bhajan · 1560

Ankhiyan Hari Darshan Ki Pyasi

अँखियाँ हरि दर्शन की प्यासी

Surdas· Bhakti Movement (Krishna)
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अँखियाँ हरि दर्शन की प्यासी। देख्यो चाहत कमल-नयन को, निशिदिन रहत उदासी। आये ऊधौ फिरि गए आँगन डारि गयो गल फाँसी। केसरि तिलक मोतिन की माला, वृंदावन के बासी। काहूकी कछू सुनत नहीं है, सूर सबै मति नासी॥
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