ज़िन्दगी के... कमरों में अँधेरे,
लगाता है चक्कर कोई एक लगातार;
आवाज़ पैरों की देती है सुनाई
बार-बार... बार-बार...
वह नहीं दिखाई देता, किन्तु,
मुझे लगातार, महसूस होता है
कि पीछे-पीछे मेरे,
गहन-अँधेरी खोहों-सी आँखोंवाला,
लंबी-दढ़ियलवाला, दुबला-सा लंबा-सा
कोई एक चलता है, ठहरता है।