छाप तिलक सब छीनी
छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके।
प्रेम भटी का मदवा पिलाइके,
मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके।
गोरी गोरी बइयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ,
बइयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके।
बल बल जाऊँ मैं तोरे रंग रजवा,
अपनी सी रंग दीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके।
[Legendary qawwali by Amir Khusro dedicated to his master Nizamuddin Auliya. Public domain.]