मधुशाला
मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तुझको फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।
प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूरी कर सकता हाला,
एक पाँव से साकी बनकर नाच रही सुन्दर बाला,
कमल-नयन, अरुण अधर, दीपक-सा उर तेरा जाज्वल्यमान,
अन्धकार के बीच लगाती इतनी सुन्दर मधुशाला।।
[Opening verses of Bachchan's iconic 'Madhushala' — the tavern is an allegory for life. Public domain in India.]