Do Bailon Ki Katha (Excerpt) दो बैलों की कथा — Munshi Premchand (1931) ---------------------------------------- झूरी काछी के पास दो बैल थे — हीरा और मोती। दोनों पछाईं नस्ल के थे — देखने में सुन्दर, काम में चौकस, डील में ऊँचे। बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था। दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक भाषा में विचार-विनिमय किया करते थे। ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work