Agneepath अग्निपथ — Harivansh Rai Bachchan (1957) ---------------------------------------- वृक्ष हों भले खड़े, हों घने, हों बड़े, एक पत्र छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत! अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ! तू न थकेगा कभी! तू न थमेगा कभी! तू न मुड़ेगा कभी! कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ! अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ! ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work