Himalaya हिमालय — Ramdhari Singh Dinkar (1946) ---------------------------------------- मेरे नगपति! मेरे विशाल! साकार, दिव्य, गौरव विराट, पौरुष के पुंजीभूत ज्वाल, मेरी जननी के हिम-किरीट, मेरे भारत के दिव्य भाल। ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work