Kamayani (Chinta Sarga Opening) कामायनी — चिन्ता सर्ग — Jaishankar Prasad (1936) ---------------------------------------- हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह, एक पुरुष, भीगे नयनों से देख रहा था प्रलय-प्रवाह। नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन, एक तत्त्व की ही प्रधानता, कहो उसे जड़ या चेतन। ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work