Samar Shesh Hai समर शेष है — Ramdhari Singh Dinkar (1954) ---------------------------------------- समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध। समर शेष है, यह प्रकाश केवल हिमगिरि पर होगा, यह ज्वाला केवल पर्वत के अंगारों में सोगी। ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work