Kavitavali (Selection) कवितावली — Tulsidas (1580) ---------------------------------------- राम की तनया सुहावन जाति, सजी अरु साजी बरात है आई। शोभा अलौकिक श्यामल गात, विलोकत जीवन जीव लजाई॥ ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work