Nadi नदी — Kedarnath Singh (1980) ---------------------------------------- अगर धीरे चलो, वह तुम्हें छू लेगी, अगर दौड़ो, तो पीछे छूट जाएगी। अगर पीठ फेरो, तो पुकारेगी, अगर मुड़ के देखो, तो कुछ नहीं कहेगी। ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work