Rashmirathi (Third Canto) रश्मिरथी — तृतीय सर्ग — Ramdhari Singh Dinkar (1952) ---------------------------------------- कृष्ण की चेतावनी— वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है। यदि रक्त-भरे बादल छाते, तो ये कमजोर नहीं पाते। तूने बेधे थे रवि जब से, यह उगते जाते हैं तब से। ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work