Charan Kamal Bandau Hari Rai चरण कमल बंदौं हरि राय — Surdas (1560) ---------------------------------------- चरण कमल बंदौं हरि राय। जाकी कृपा पंगु गिरि लंघे, अंधे को सब कुछ दरसाय। बहिरो सुने, मूक पुनि बोले, रंक चले सिर छत्र धराय। सूरदास स्वामी करुणामय, बार-बार बंदौं तिहि पाय॥ ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work