Rahiman Dhaga Prem Ka रहिमन धागा प्रेम का — Rahim (1600) ---------------------------------------- रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ि जाय॥ रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥ रहिमन विपदा हूँ भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय॥ ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work