Vipada विपदा — Mahadevi Verma (1938) ---------------------------------------- कौन तुम मेरे हृदय में? कौन मेरी शून्यता के अंतरिक्ष में गूँज सा जो घुल गया है? कौन प्रति-पग-चिह्न सा मेरे लिए गंतव्य के मग पर बिछा है? ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work