Hanuman Chalisa (Opening) हनुमान चालीसा — Tulsidas (1580) ---------------------------------------- श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work