Aaj Rang Hai आज रंग है — Amir Khusro (1320) ---------------------------------------- आज रंग है ऐ माँ रंग है री। मेरे महबूब के घर रंग है री। अरे अल्लाह तू ही रंग है री। मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया। निजामुद्दीन औलिया मोहे पीर पायो। मैं तो जब देखूँ मोरे संग है री॥ ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work