Jo Tum Aa Jate Ek Baar जो तुम आ जाते एक बार — Mahadevi Verma (1937) ---------------------------------------- जो तुम आ जाते एक बार, कितनी करुणा कितने संदेश, पथ में बिछ जाते बन पराग, गाता प्राणों का तार-तार, अनुरागी मन अनुरागमयी होकर आती जो तुम आ जाते एक बार॥ ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work