Guru Govind Doha गुरु गोविंद दोहा — Kabir (1450) ---------------------------------------- गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाँय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥ काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥ ---------------------------------------- Source: Kavyalekh — kavyalekh.com Public domain work